Opinion

मनीष पटेल की गिरफ्तारी को कौन जातीय रंग दे रहा है?

रीवा : समाज में आज भी जातिवाद का रंग घोलने वालों की कमी नहीं है. यदि किसी मामले में पुलिस कार्रवाई करे तो बुरा, नहीं करे तो बुरा… कोई गलत काम करे तो कार्रवाई करने पर फला जाति के विरुद्ध कार्रवाई कर दी. आज के दौर में भी समाज का इतना हल्कापन कई सवाल पैदा करता है. अब रीवा में मनीष पटेल की गिरफ्तारी का ही मामला ले लीजिए. इस पर कुछ लोग सोशल मीडिया में ऐसे अनर्गल प्रलाप कर रहे हैँ जैसे पुलिस और न्याय व्यवस्था ने किसी आरोपी पर नहीं जाति पर कार्रवाई की है. सोशल मीडिया पर ब्राह्मणों की बेटियों के विरुद्ध अनर्गल टिप्पणी के मामले में आरोपी यूट्यूबर मनीष पटेल ने बुधवार को सिविल लाइन थाने में आत्मसमर्पण कर दिया था. इस मामले ने अब जातिवाद का ऐसा रंग ले लिया है जो सभ्य समाज के लिए अच्छा नहीं कहा जाएगा.

कुछ असमाजिक तत्व या कहें सामाजिक समरसता के दुश्मन उसकी गिरफ्तारी को गलत बताकर सोशल मीडिया पर अभियान चलाया जा रहे हैं. पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए जा रहे हैं. सवाल है कि क्या क़ानून अपना कार्य नहीं करे.

सवाल इसलिए भी उठ रहे हैँ क्योंकि पुलिस ने आरोपी का आपराधिक बैकग्राउंड सार्वजनिक करते हुए साफ किया है कि उसके खिलाफ पहले से कई गंभीर मामले दर्ज हैं.

पुलिस दस्तावेजों के मुताबिक मनीष पटेल के खिलाफ रीवा के ही विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र में तीन मामले, सिविल लाइन थाने में एक मामला और समान थाने में भी एक मामला दर्ज है।

इसके साथ ही सिविल लाइन थाने में उसके खिलाफ आईटी एक्ट का छठवां मामला भी दर्ज है. साथ ही वह मोबाइल लूट के एक मामले में स्थायी वारंटी भी बताया जा रहा है.

एक मीडिया रिपोर्ट में थाना प्रभारी विजय सिंह ने कहा, कि सिविल लाइन थाने में आरोपी के खिलाफ चोरी का एक प्रकरण वर्ष 2016 में दर्ज किया गया था. इसी तरह साल 2016 में ही शहर के विश्वविद्यालय थाने में उसके खिलाफ चोरी का एक, लूट का एक और मारपीट का एक प्रकरण दर्ज किया गया था. वहीं समान थाने में भी वर्ष 2016 में ही चोरी का एक प्रकरण दर्ज किया जा चुका है.

उन्होंने बताया कि पुलिस सभी पुराने और वर्तमान मामलों को एक साथ जोड़कर जांच कर रही है। सरेंडर के बाद मामला सोशल मीडिया पर और गरमा गया है, जहां एक ओर लोग पुलिस कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं तो दूसरी ओर कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं.

पुलिस का कहना है कि विवादित पोस्ट के निर्माण और प्रसार में किसी अन्य व्यक्ति या नेटवर्क की भूमिका की भी जांच की जा रही है.

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