शाखा संगम का ऐसा भव्य आयोजन, आप भी राष्ट्र सेविका समिति से जुड़कर कर सकती हैं ये बड़े काम

रायपुर : एक महिला पूरे परिवार और समाज में संस्कार का केंद्र होती है। महिलाएं हमारे सनातन संस्कृति में मातृशक्ति कही जाती हैं। बेटियों और बहनों की शक्ति को पहचानकर उसे समाज में दिशा देने में राष्ट्र सेविका समिति अहम भूमिका निभा रही है। राष्ट्र सेविका समिति, रायपुर महानगर की 21 शाखाओं का भव्य “शाखा संगम” सुभाष स्टेडियम नलघर चौक, रायपुर में 11 अप्रैल 2026 शनिवार को सायं 4 बजे हुआ। कार्यक्रम में वंदनीय प्रमुख संचालिका शांताक्का जी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
शाखा संगम में अखिल भारतीय सहकार्यवाहिका माननीय सुलभा देशपांडे जी ,अखिल भारतीय सह घोष प्रमुख माननीय प्राची सुभाष पाटिल जी, छत्तीसगढ़ प्रांत कार्यवाहिका माननीय प्राजक्ता देशमुख जी एवं अन्य प्रांत कार्यकारिणी बहनें उपस्थित थीं।
251 गणवेशधारी सेविकाओं ने घोष वादन के साथ ध्वजारोहण और प्रार्थना कर शाखा लगाई। शाखा में व्यायाम, योग, गण समता, खेल और नियुद्ध के अभ्यास किए गए। 21 ध्वजों के बीच भारत माता के जयघोष विहंगम दृश्य प्रस्तुत कर रहे थे। शाखा संगम में बहनों के प्रदर्शन तथा अनुशासन को जिसने भी देखा अद्भुत कहा।
वंदनीय प्रमुख संचालिका जी ने राष्ट्र के निर्माण के लिए आवश्यक “उत्तम व्यक्तित्व निर्माण” कार्य राष्ट्र सेविका समिति द्वारा किए जाने पर प्रकाश डाला। तेजस्वी हिंदू राष्ट्र के निर्माण का ध्येय लिए समिति की कार्यकर्ता बहनें निरंतर कार्यशील हैं।
शांताक्का जी ने किसी कार्य में उद्देश्य प्राप्ति हेतु पांच कार्यों का अधिनियमन करते हुए कहा कि मनुष्य यदि अपने कार्य के ध्येय का ध्यान कभी ना भूले तो उसके कार्य की यशस्विता निश्चित होती है। “विवेकी कार्यकर्ता” उद्देश्य पूर्ति को दृढता देते हैं। “कार्य की विधि” से कार्य की सिद्धि होती है। चेष्टा करते समय सभी “उपक्रमों का उपयोग” किया जाए और कार्य पर “भगवान का अनुग्रह” हो तो कार्य अवश्य पूर्ण होता है।
प्रमुख संचालिका जी ने राष्ट्रीय हित के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए शाखा को माध्यम बताया उनके अनुसार शाखा में ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ का भाव निर्माण होता है। शाखा में मन से ,सेवा भाव से, निष्ठा से कार्य करते हुए, सेविका आज्ञा पालन, विनम्र होना और अहंकार का त्याग करना सिखती हैं।
माननीय शांताक्का जी ने आगे बताया कि शाखा ध्येयपूर्ण, आनंदपूर्ण और उत्साहपूर्ण वातावरण में संचालित होनी चाहिए। शाखा में विभिन्न क्रियाकलाप के साथ सेविका में ‘मैं’ नहीं ‘हम’ की भावना प्रबल होती जानी चाहिए।
राष्ट्र सेविका समिति समाजिक नकारात्मक बदलाव के प्रति सजग है। वह मूल विचार का संरक्षण करती है। समिति सामाजिक विषयों पर विचार कर कुसंस्कृतियों के प्रति बहनों में सहजता, सजगता और सबलता का गुण विकसित करती है।
‘राष्ट्रहिताय जीवनम्’ को आत्मसात करती सेविका बहनों ने ‘शाखा संगम’ के इस वृहद कार्यक्रम का समापन ’वंदे मातरम्’ गायन के साथ किया।






