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‘अपमानजनक शब्दों’ पर भड़के कर्मचारी-अधिकारी संगठन, क्या सुशासन तिहार को बदनाम कर रहे कुछ नेता?

रायपुर। छत्तीसगढ़ में इन दिनों सुशासन तिहार चल रहा है. मुख्यमंत्री हर जिले के दूरस्थ गांव का दौरा कर रहे हैं. वहां लोगों से प्रत्यक्ष मुलाकात कर उनका सुख-दुख जानने की कोशिश करते हैं. जन समस्या निवारण शिविर में लोगों के आवेदन लेकर उस पर आगे की कार्रवाई होती है. सुशासन तिहार साय सरकार द्वारा जनता से कनेक्ट होने का सबसे बड़ा अभियान है. इस दौरान हर जिले में उमड़ रही अच्छी खासी भीड़ से इस अभियान की सफलता का अंदाजा लगाया जा सकता है. हालांकि इस अभियान को कुछ नेताओं ने राजनीतिक प्रतिद्वंदिता का अखाड़ा बना दिया है. एक ओर जहां सीएम साय जनता के बीच जा रहे हैं वहीं कुछ नेता अपने बयानों से अपनी ही पार्टी की सरकार को कठघरे में लाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं. सुशासन तिहार को लेकर जहां कर्मचारी अधिकारी लगातार 40 से 43 डिग्री तापमान में मेहनत कर रहे हैं, वहीं इस दौरान जगह-जगह अधिकारियों और कर्मचारियों को खरी खोटी सुनाने वाले नेताओं पर अब कर्मचारी संगठन नाराज हैं.

छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन का कहना है कि अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ सार्वजनिक रूप से अपमानजनक व्यवहार किया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों का मनोबल टूट रहा है. फेडरेशन के प्रांतीय महासचिव चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि सरकार का सुशासन तिहार कर्मचारियों के माध्यम से ही संचालित होता है और विभागीय कर्मचारी जनता के रुके हुए कार्यों का निराकरण करते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ छोटे जनप्रतिनिधि कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं और सोशल मीडिया में उसका प्रचार-प्रसार भी किया जाता है, जिससे कर्मचारी आहत होते हैं. उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को एक दायरे में रहकर समस्याओं का समाधान करना चाहिए.

कर्मचारी संगठनों की ओर से यह बयान क्या आया कांग्रेस को मानो राजनीति का मुद्दा मिल गया. इस मुद्दे को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है. बैज ने कहा कि सुशासन तिहार पूरी तरह फेल साबित हुआ है और यह केवल टाइम पास का कार्यक्रम बनकर रह गया है.

दूसरी ओर इस मुद्दे पर मंत्री खुशवंत साहेब ने कहा कि इसे “रीलबाजी” कहना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि दोनों को सामंजस्य के साथ जनता के हित में काम करना चाहिए, तभी सुशासन का उद्देश्य पूरा हो सकेगा.

सवाल यह है कि आखिर भाजपा के कुछ नेता सुशासन तिहार के मौके पर अपनी ही सरकार को क्यों घेरने में जुटे हैं। क्या वह वाकई लोगों की समस्याओं के प्रति गंभीर हैं या फिर सिर्फ अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए यह सब कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जब खुद लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहे हैं तो ऐसे अधिकारियों की शिकायत उचित फोरम पर भी की जा सकती है. हमारे जनप्रतिनिधि और अधिकारियों को यह समझना होगा कि लोकतंत्र में हर स्तंभ की महत्वपूर्ण भूमिका है.

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