Opinion

बेमेतरा : सीएम के कार्यक्रम में लापरवाही, क्या हटाई जाएंगी कलेक्टर?

रायपुर : छत्तीसगढ़ में इन दिनों सुशासन तिहार चल रहा है. सीएम अपने मंत्रियों और अधिकारी के साथ गांव गली और मोहल्लों में जा रहे हैं. जनता से डायरेक्ट बात कर रहे हैं, उनसे फीडबैक ले रहे हैं. इस बीच सुशासन तिहार के दौरान 31 मई को बेमेतरा में बड़ा ही अटपटा मामला सामने आया. यहाँ जिला प्रशासन ने सरकार की ऐसी फजीहत कराई जिस पर अब न तो सत्ता पक्ष को कुछ बोलते बन रहा न निगलते. यहाँ सामूहिक विवाह का कार्यक्रम आयोजित किया गया था. सामूहिक विवाह का कार्यक्रम जो कि भाजपा विधायक दीपेश साहू की शादी की वजह से काफी हाई प्रोफ़ाइल हो गया. जाहिर है कई दिग्गज कार्यक्रम में पहुंचे लेकिन कार्यक्रम के बाद जिला प्रशासन और अधिकारियों के रुख को लेकर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह बेहद नाराज दिखे. यहाँ तक की काफी शांत रहने वाले डॉ रमन सिंह ने मंच से ही जिला प्रशासन यानी कलेक्टर व एसपी के रवैये परनाराज़गी जाहिर कर दी. उन्होंने उनकी नाराजगी से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है. इस वीडियो में डॉ. रमन सिंह मंच से मंच से ही प्रशासन को फटकार लगाते हुए कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री और दो-दो उपमुख्यमंत्री यहां मौजूद हैं, कैबिनेट के कई मंत्री मौज़ूद हैं लेकिन उनकी गरिमा के अनुरूप यह कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया है.

उन्होंने कलेक्टर और एसपी को सीधे शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, ‘यह कोई तरीका नहीं है कि मुख्यमंत्री जी का पीछे से स्वागत किया जाए.’ उन्होंने कहा कि ढाई घंटे में भी प्रशासन एक वैकल्पिक जगह नहीं तलाश पाया. अपने 15 साल के मुख्यमंत्री कार्यकाल का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने आज तक ऐसी अव्यवस्था नहीं देखी है.
सूत्रों के मुताबिक सीएम साय भी अधिकारियों की इस लापरवाही पर खासे नाराज़ हैं और जल्द ही कलेक्टर पर कार्रवाई की जा सकती है. दरअसल यह पूरा मामला बेहद लापरवाही और उदासीनता से जुड़ा है. राज्य के मुखिया सीएम के कार्यक्रम का एक प्रोटोकॉल और गरिमा होता है, उसकी अनदेखी यह बताता है कि कुछ अधिकारी अपने कर्तव्य के प्रति कितने उदासीन हैं. जिले में प्रतिष्ठा ममगाई कलेक्टर हैं, 2018 बैच की आईएएस अधिकारी प्रतिष्ठा पहले नारायणपुर में कलेक्टर रह चुकी हैं. राज्य सरकार ने युवा अधिकारियों को प्रशासन की बागडोर भले ही सौंपी लेकिन कुछ अधिकारी अपनी उदासीनता से सरकार की छवि ख़राब कर ही देते हैं. सोशल मीडिया में इस मुद्दे पर लोग जिला प्रशासन और अधिकारियों की कार्यशैली पर निशाना साध रहे हैं.

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