अटल बिहारी वाजपेयी के करीबी नेताओं में शुमार पूर्व सांसद चंद्रमणि त्रिपाठी को लोगों ने किया याद…

रीवा : स्वर्गीय सांसद चंद्रमणि त्रिपाठी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें बड़ी संख्या में लोगों ने याद किया. सौदामिनी सेवा संस्थान के तत्वावधान में “भारत में संसदीय लोकतंत्र और राजनीतिक दलों की भूमिका” विषय पर एक गरिमामय व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का आयोजन माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, रीवा परिसर में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति रही.
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रख्यात पत्रकार एवं शिक्षाविद् कुलगुरू श्री विजय मनोहर तिवारी उपस्थित रहे. कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व विधायक श्री प्रभाकर सिंह ने की. विशिष्ट अतिथि के रूप में ABVP के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. डॉ. रघुराज किशोर तिवारी, श्री जयराम शुक्ला, परिसर निदेशक श्री सतेंद्र डहेरिया, विस्तार न्यूज से अंचल शुक्ला, मंचासीन श्रीमती ऊषा त्रिपाठी एवं कार्यक्रम संयोजक श्रीमती प्रज्ञा त्रिपाठी उपस्थित रहीं.
मुख्य वक्ता कुलपति विजय मनोहर तिवारी ने अपने विस्तृत एवं विचारोत्तेजक उद्बोधन में भारत की लगभग दो हजार वर्षों पुरानी गणराज्यीय परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की लोकतांत्रिक चेतना कोई आधुनिक अवधारणा नहीं, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न अंग रही है. उन्होंने प्राचीन गणराज्यों, सभा-समितियों एवं लोकभागीदारी की परंपरा को आधुनिक संसदीय लोकतंत्र की जड़ों से जोड़ा.
उन्होंने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकों, उत्तरदायी राजनीतिक दलों और पारदर्शी शासन व्यवस्था से निर्मित होता है. आजादी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता केवल अधिकार नहीं, बल्कि एक सतत जिम्मेदारी है, जिसे बनाए रखने के लिए नागरिकों को सजग रहना आवश्यक है.
संविधान की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान में निहित मूल्यों—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व—को व्यवहार में उतारना ही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है। उन्होंने वर्तमान समय की चुनौतियों जैसे राजनीतिक ध्रुवीकरण, वैचारिक असहिष्णुता, सामाजिक विभाजन एवं सूचना के दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की.
भविष्य की चुनौतियों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को सशक्त बनाए रखने के लिए शिक्षा, नैतिकता और नागरिक भागीदारी को प्राथमिकता देनी होगी. उन्होंने आम नागरिकों से अपेक्षा जताई कि वे केवल मतदाता न बनें, बल्कि राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं.
अध्यक्षीय उद्बोधन में पूर्व विधायक प्रभाकर सिंह जी ने स्व. चंद्रमणि त्रिपाठी जी के संघर्षपूर्ण जीवन को याद करते हुए उन्हें लोकतांत्रिक मूल्यों का सच्चा प्रहरी बताया.
प्रो. डॉ. रघुराज किशोर तिवारी जी ने शिक्षा और लोकतंत्र के संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जागरूक और शिक्षित समाज ही सशक्त लोकतंत्र की नींव है। वर्तमान चल रहे विभिन्न प्रकार के विमर्श में सजग रहने की आवश्यकता पर जोर दिया.
श्री जयराम शुक्ला जी ने संविधान की मूल भावना और सामाजिक समरसता पर अपने विचार रखे.
परिसर निदेशक श्री सतेंद्र डहेरिया जी ने विश्वविद्यालय की ओर से आभार व्यक्त करते हुए ऐसे कार्यक्रमों को विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक बताया.
अन्य वक्ताओं ने भी स्व. चंद्रमणि त्रिपाठी जी के व्यक्तित्व, उनके लोकतांत्रिक योगदान और सामाजिक सरोकारों को स्मरण करते हुए अपने विचार व्यक्त किए.
कार्यक्रम में समाजवादी आंदोलन के वरिष्ठ साथी दादा श्री बृहस्पति सिंह, श्री राम सिंह, मीसाबंदी बसंत दुबे जी, मीसाबंदी एवं पूर्व महापौर श्री राजेंद्र ताम्रकार, महाबली गौतम, रामनारायण मिश्रा, भारतीय जनता पार्टी के निवर्तमान जिला अध्यक्ष डॉ. अजय सिंह, डॉ. प्रभाकर चतुर्वेदी, विजय श्रीवास्तव, संतोष सिंह सिसोदिया, डॉ. प्रवीण तिवारी, चेतना मिश्रा, रामनारायण तिवारी, मयूरी सिंह, रवीना साकेत सहित पारिवारिक सदस्य वंशगोपाल त्रिपाठी एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे.
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन अम्बिकेश सिंह ने किया, जबकि अंत में डॉ. व्योमकेश शुक्ल ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया.
यह व्याख्यानमाला न केवल स्वर्गीय चंद्रमणि त्रिपाठी जी को श्रद्धांजलि थी, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और नागरिक कर्तव्यों पर गंभीर चिंतन का एक सार्थक मंच भी सिद्ध हुई.






