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समय पर पेमेंट नहीं दिया तो लगा दिया सैक्सुअल हैरेसमेंट का केस, 9 साल बाद हुआ पछतावा!

मुंबई : आजकल सैक्सुअल हैरेसमेंट, यौन शोषण, शारीरिक शोषण के झूठे आरोपों की बाढ़ सी आ गई है. यहां तक की अब तो पुरुष आयोग बनाए जाने की मांग भी की जा रही है. न्यायालय में दहेज प्रताड़ना की तरह ही सैक्सुअल हैरेसमेंट के अधिकांश मामले झूठे साबित होते हैं. देश के न्यायालयों द्वारा चिंता जाहिर किए जाने के बाद भी इनमें कमी नहीं आ रही है, बल्कि यह लगातार बढ़ रहे हैं. इन दिनों टीवी सीरियल ‘भाभीजी घर पर हैं’ फेम एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे का एक बयान काफी चर्चा में है, जिसमें एक पॉडकास्ट-इंटरव्यू में उन्होंने खुलासा करते हुए कहा, कि उन्होंने टीवी शो के निर्माता पर झूठे आरोपों लगाए थे. उन्होंने हाल ही में हर्ष लिंबाचिया के शो में ‘भाभीजी घर पर हैं’ के निर्माता संजय कोहली पर सैक्सुअल हैरेसमेंट का झूठा आरोप लगाने की बात स्वीकार्य की. इस पर सोशल मीडिया पर उनकी काफी आलोचना हो रही है, लोग झूठे आरोपों की वजह से अपनी इज्जत और करियर सब बर्बाद कर लेने वाले संजय कोहली के साथ न्याय की मांग कर रहे हैं.

शिल्पा शिंदे के झूठे आरोप लगाने की बात को स्वीकार करने के बाद उन्हें कड़ी आलोचना भी झेलनी पड़ी थी. इसमें पूजा बेदी से लेकर हिना खान तक का नाम शामिल है, जिन्होंने उनकी निंदा की. शुक्रवार को ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने इंस्टाग्राम पर एक बयान भी जारी किया था, जिसमें कहा था, ‘शिल्पा के ‘भाभीजी घर पर हैं’ के निर्माता संजय कोहली के खिलाफ यौन उत्पीड़न के झूठे आरोप लगाने की बात स्वीकार करना पूरे बॉलीवुड और टेलीविजन इंडस्ट्री के लिए चिंता का विषय है.’ दूसरी ओर एक्ट्रेस भी ट्रोल्स को जवाब देने से पीछे नहीं हट रहीं. उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि जो उनके साथ तब हुआ, अगर वो उस वक्त सुसाइड कर लेतीं क्या तब भी लोग उनपर हंसते? अभिनेत्री ने ये भी कहा कि यह उनकी मजबूरी थी, जिसकी वजह से उन्हें ये कदम उठाना पड़ा. उन्हें अपने पैसे चाहिए थे, जिसकी वजह से ये पूरा ड्रामा रचा गया.

सवाल यह है कि शिल्पा शिंदे के सामने आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि उन्हें डायरेक्टर के ऊपर इतना गंभीर आरोप लगाना पड़ा. क्या उनके पास दूसरे कोई विकल्प नहीं थे? क्या ऐसे मामले कानून से खिलवाड़ नहीं? यदि इस तरह के मामले देश में बढ़ रहे हैं तो उन्हें लेकर सरकारें और न्याय व्यवस्था कड़े कानून क्यों नहीं बनाती? पुरुषों के ऊपर भी प्रताड़ना के कई ऐसे मामले हर दिन सामने आते हैं लेकिन उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती? पुरुष आयोग की मांग लंबे समय से देश में हो रही है उसका गठन कब तक होगा?

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