बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पर्यावरणीय रिपोर्टिंग पर मीडिया कार्यशाला

बांधवगढ़, 23 अगस्त, 2026 : WWF-India ने आज बांधवगढ़ में एक विशेष मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य पर्यावरण और संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर सटीक, तथ्यपरक और जागरूक रिपोर्टिंग को बढ़ावा देना था।
बांधवगढ़ के आसपास के जिलों से आए पत्रकारों ने कार्यशाला में भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य स्थानीय संरक्षण चुनौतियों, वन्यजीव संरक्षण और तथ्य-आधारित पर्यावरणीय पत्रकारिता की आवश्यकता को लेकर पत्रकारों की समझ को बेहतर बनाना था। साथ ही, पारिस्थितिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करने वाले मीडिया कर्मियों में जागरूकता, संवेदनशीलता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
कार्यशाला के दौरान दैनिक भास्कर, नई दुनिया, पत्रिका, PTI, ETV भारत, आज तक और बंसल न्यूज सहित राष्ट्रीय और स्थानीय मीडिया संस्थानों के 26 पत्रकारों ने वन अधिकारियों के साथ क्षेत्र में संरक्षण प्रयासों और उनसे जुड़ी चुनौतियों पर आयोजित विशेष सत्रों में भाग लिया। इन सत्रों में कॉरिडोर कनेक्टिविटी और उसका महत्व, हाथी कॉरिडोर, संरक्षण की कार्यप्रणालियां एवं चुनौतियां तथा मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
प्रतिभागियों को इस परिदृश्य में सामने आ रही संरक्षण संबंधी चुनौतियों तथा वन विभाग और अन्य हितधारकों द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में जानकारी दी गई। WWF-India की टीम ने भारत में संरक्षण संचार के लिए अपनाए जा रहे नैतिक मानकों और बेहतर कार्यप्रणालियों पर भी प्रकाश डाला तथा वन्यजीव और संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर सटीक, संतुलित और जिम्मेदार रिपोर्टिंग के महत्व को रेखांकित किया।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप निदेशक श्री योहान कटारा जी ने मीडिया कर्मियों के लिए इस तरह की कार्यशाला आयोजित करने की पहल और पत्रकारों के कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि आमतौर पर बांधवगढ़ से संबंधित मीडिया कवरेज रचनात्मक और सकारात्मक रहती है। उन्होंने कहा कि बांधवगढ़ एक प्रमुख पर्यटन स्थल है और यहां संरक्षण के साथ-साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष का प्रभावी प्रबंधन भी आवश्यक है। उन्होंने बताया कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में होने वाली सभी घटनाओं को लेकर पूरी पारदर्शिता बरती जाती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पत्रकार संरक्षण-केंद्रित और तथ्यात्मक कहानियों को सामने लाएंगे तथा लोगों और वन्यजीवों, दोनों की आवाज बनेंगे।
दैनिक भास्कर के श्री हरिकृष्णा दुबोलिया ने कहा, “बांधवगढ़ मध्य प्रदेश का सर्वाधिक बाघ आबादी वाला टाइगर रिजर्व होने के साथ जैव-विविधता से समृद्ध स्थल भी है। लेकिन व्यावसायिकता की दौड़ और बाघों की बढ़ती आबादी से मानव वन्य जीव संघर्ष की घटनाएं यहां लगातार बढ़ रही है। जो इसके संरक्षण में गंभीर चुनौती है। ऐसे में प्रेस और मीडिया की जिम्मेदारी है कि पर्यावरण और वन्य जीव कानूनों का पालन सुनिश्चित हो। जहां कानूनों का उल्लंघन होता दिख रहा है हमें उसे ठीक ढंग से और संवेदनशीलता के साथ रिपोर्ट करना चाहिए।”
WWF-India की हेड – कंजर्वेशन पार्टनरशिप्स, नेहा सिन्हा ने कहा, “किसी मीडिया आलेख का स्वर लोगों और उनकी सोच को प्रभावित करता है और इसका असर नीतियों पर भी पड़ सकता है। यदि हर एक संघर्ष की घटना के बाद पूरे वन्यजीव समुदाय को दोषी ठहराया जाता है, तो इससे न केवल वन्यजीवों को नुकसान पहुंचता है, बल्कि लोगों पर भी मनोवैज्ञानिक दबाव पड़ सकता है। समाचारों में लोगों और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील रहते हुए तथ्यपरक रिपोर्टिंग करना संभव है, बजाय इसके कि वन्यजीवों को ‘अपराधी’ के रूप में प्रस्तुत किया जाए। मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारणों और इसके समाधान की संभावनाओं पर भी खोजपरक कहानियां की जा सकती हैं। बांधवगढ़ में होने वाली मीडिया कवरेज दूसरों के लिए एक उदाहरण बन सकती है।”
कार्यशाला का समापन वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता और जिम्मेदार एवं तथ्यपरक पर्यावरणीय रिपोर्टिंग के संकल्प के साथ हुआ।






