Opinion

गर्मी आते ही रायपुर की कई कॉलोनियों में जल संकट गहराया, कांग्रेस ने बनाया सियासी मुद्दा

रायपुर: हर साल की तरह रायपुर में गर्मियों की शुरुआत से ही जलसंकट देखने को मिल रहा है। राजधानी में ऐसी शायद ही कोई कॉलोनी हो जहां वाटर लेवल कम न हुआ हो, ऐसे में जल संकट देखने को मिल रहा है। कई जगह तो नगर निगम के टैंकरों के जरिए पानी की सप्लाई की जा रही है, लेकिन अभी भी कई कॉलोनियों में रहवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पूरे प्रदेश में पेयजल की समस्या को लेकर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा की सरकार की अकर्मण्यता के चलते गर्मी शुरू होते ही लोग पेयजल के लिए भटकने मजबूर हैं, टैंकर मुक्त करने का दावा झूठा साबित हुआ, कई मोहल्लों में सुबह से शाम टैंकरों के इंतजार में ही बीतने लगा है। सभी घरों में पीने के साफ पानी पहुंचाने की योजना को 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार के कार्यकाल में जल जीवन मिशन का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका था, लेकिन भाजपा की सरकार बनने के बाद से दुर्भावना पूर्वक काम रोक दिया गया। अपने चहेतों को काम देने के लिए पूर्व में अप्रूव अनेकों निविदाएं निरस्त कर दिए, कई जिलों में काम पूरी तरह से बंद है और अब योजना का लक्ष्य बढ़ाकर 2028 तक कर दिया गया है। अब एक बार फिर भाजपा के डबल और ट्रिपल इंजन सरकार में टैंकरों के भरोसे लोग पेयजल के लिए आश्रित होने मजबूर हैं।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि पिछले सवा दो साल की सरकार के दौरान यदि ईमानदारी से काम किया गया होता तो यह परिस्थिति आज नहीं होती, हर घर तक स्वच्छ पेयजल आसानी से पहुंच रहा होता। इनकी मंशा टैंकरों में कमीशनखोरी की है न कि जनता को स्थाई राहत देने की। अनेकों ऐसे मामले उजागर हुए हैं जिनमें बिना जल स्रोत की उपलब्धता के केवल पानी की टंकी बनाकर पाइपलाइन बिछा दी गई है। करोड़ों का खर्च होने के बाद भी इसका लाभ जनता को नहीं मिल पा रहा है। भाजपा सरकार के फोकस में केवल कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि प्रदेश के लगभग सभी बड़े बांध और जलाशय भरे हुए हैं, पर्याप्त मात्रा में वहां पर पानी की उपलब्धता है, लेकिन सरकार की दुर्भावना और आक्रमान्यता के चलते अभी से ही पेयजल की संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार के कार्यकाल में नल जल योजना के तहत जो सुविधाएं प्रारंभ हुई थी, भाजपा की सरकार उसे मेंटेन तक नहीं कर पा रही है। छोटे-छोटे मेंटेनेंस का काम तक यह सरकार नहीं कर पा रही है। वाल्व में लीकेज और वाटर लेवल नीचे चले जाने पर बोरवेल में अतिरिक्त पाइप डालने तक का काम इस सरकार से नहीं हो पा रहा है। मोटर की खराबी और बिजली की अनुपलब्धता के चलते कई गांव में पेयजल की सप्लाई बाधित है। भाजपा सरकार की बदनीयती के चलते प्रदेश की जनता का स्वच्छ पेयजल पाने की आस अब टूटने लगी है। डबल इंजन की सरकार में छत्तीसगढ़ की जनता पर दोहरा अत्याचार हो रहा है।

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