जेंडर बजटिंग का मॉडल स्टेट बना छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने कार्यकाल का तीसरा बजट पेश कर दिया है। बजट पर पेश है जया लक्ष्मी तिवारी का विश्लेषण
विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार इस वर्ष को महतारी गौरव वर्ष के रूप में मना रही है। इसका उद्देश्य महिलाओं को विभिन्न जनकल्याणकारी नीतियों के केन्द्र में लाकर संपूर्ण समाज का विकास करना है। 24 फरवरी को प्रदेश के युवा वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा पेश किए गए बजट में महिला एवं बाल कल्याण से जुड़े अनेक ठोस प्रावधान किए गए हैं। यह जेंडर बजटिंग की उस आधुनिक अवधारणा को साकार करता है, जो भारतीय समाज में हजारों वर्षों से यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः के रूप में विद्यामान है। लोक नीति के क्षेत्र में जेंडर बजटिंग एक ऐसी प्रक्रिया जिसमें नीतियों के निर्माण, उनके क्रियान्वयन तथा बजटीय आवंटन में यह सुनिश्चित किया जाता है कि महिलाओं को पुरूषों के बराबर अवसर मिलें। छत्तीसगढ़ में महिलाओं की जनसंख्या 1.27 करोड़ (49.76 प्रतिशत) है, ऐसे में उनके उत्थान के जरिए संपूर्ण समाज के कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़ी योजनाओं हेतु 11 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। साय सरकार ने अपनी सबसे महात्वाकांक्षी योजना महतारी वंदन हेतु 8,200 करोड़ रूपये का प्रावधान कर अपनी वरीयता स्पष्ट कर दी है। छत्तीसगढ़ कुपोषण के विरुद्ध जिस तरह देशभर में सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं (बेस्ट प्रैक्टिस) के लिए जाना जा रहा है, उस मुहिम को और प्रभावी बनाने में सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण कार्यक्रम की अहम भूमिका रहेगी। इसके लिए 2,320 करोड़ रूपए का बजटीय आवंटन सुपोषण से समृद्धि की यात्रा को आसान बनाएगा। इसी क्रम में प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना में 120 करोड़ रूपए और मिशन वात्सल्य हेतु 80 करोड़ रूपए आवंटित कर वित्त मंत्री ने कुपोषण के विरुद्ध जंग में संसाधनों की कमी को दूर करेंगे। प्रदेश में महतारी सदन निर्माण का काम जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसे आर्थिक चुनौतियां न आएं इसलिए 75 करोड़ रूपए का आवंटन किया गया है। राज्य में रानी दुर्गावती योजना शुरू की जा रही है, जिसमें बालिग होती ही बेटियों को एकमुश्त डेढ़ लाख रुपये की राशि राज्य शासन द्वारा प्रदान की जाएगी। प्रदेश में लगभग 2 लाख ऐसी महिलाएं जो कुछ साल पहले तक बैंकिंग सेवाओं से भी दूर थीं, उन्हें लखपति दीदी बनाकर स्वरोजगार एवं आजीविका संवर्धन की दिशा में छत्तीसगढ़ की बिहान योजना रोल मॉडल बनी है। लखपति दीदी भ्रमण योजना शुरू कर दूरस्थ क्षेत्रों की महिलाओं को देशभर में नवाचार सीखने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ सरकार ने पहली बार वर्ष 2007-08 में जेंडर बजटिंग को अपनाया था, निश्चित रूप से इसका असर भी देखने को मिला। जन्म के समय लिंगानुपात (एसआरबी) के मामले में 974 प्रति 1000 पुरुष के प्रभावशाली आंकड़े के साथ प्रदेश देशभर में अव्वल है। राष्ट्रीय औसत 929 से कहीं आगे यह सफलता बताती है कि प्रदेश में अब बेटियों का जन्म बोझ नहीं बल्कि उत्सव माना जाने लगा है। यह उपलब्धि प्रदेश में बालिकाओं के जन्म को प्रोत्साहन देने वाली नीतियों , सुदृढ़ स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक चेतना से संभव हुआ है। वित्त मंत्री ओपी चौधरी के द्वारा पेश किए गए साय सरकार के तीसरे बजट में ऐसे अनेक प्रावधान हैं जो सार्वजनिक मदों और सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाएंगे। इससे महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण, साक्षरता, शैक्षिक उपलब्धियों, कौशल, रोजगार और आजीविका के अवसर सृजित होंगे। बशर्ते इनके क्रियान्वयन में पूरी पारदर्शिता बरती जाए।
पिछले कुछ सालों में शासकीय योजनाओं के हितग्राहियों का एक बड़ा वर्ग मजबूत वोट बैंक बनकर भी उभरा है। इसमें कोई दो मत नहीं कि जिन राजनीतिक दलों और उनकी सरकारों ने मातृशक्ति की ताकत को पहचाना उन्हें स्वभाविक रूप से राजनीतिक रूप से भी इसका लाभ मिला है। आज देश में प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्जवला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, आयुष्मान योजना से लेकर जल जीवन मिशन जैसी अनेक महत्वाकांक्षी योजनाओं की प्राथमिक हितग्राही महिलाएं ही हैं। इससे सामाजिक एवं आर्थिक विकास के विभिन्न मानकों संख्यात्मक तथा गुणात्मक दोनों ही रूप में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि मातृशक्ति परिवार और समाज की धुरी है। परिवारिक निर्णयों से लेकर अर्थव्यवस्था में उसकी भागीदारी जितनी अधिक बढ़ेगी, सुख-समृद्धि के द्वार उसी अनुरूप खुलेंगे। छत्तीसगढ़ विकसित राज्य बनने की जिस यात्रा की ओर कदम बढ़ा रहा है, उसमें मातृशक्ति की भागीदारी सबसे अहम है। वर्तमान बजट 2026-27 में महिलाओं से जुड़ी विभिन्न नीतिगत पहलों में इसकी एक प्रमाणिक झलक देखने को मिली है।
जया लक्ष्मी तिवारी






