News

जिसकी ईमानदारी की मिसाल दी जाती थी, उस महिला IAS ने एक पल में छोड़ दी नौकरी…

एक बेहतरीन ईमानदार IAS दिव्या मित्तल ने अचानक इस्तीका देकर चौकाया

लखनऊः आईएएस बनने के लिए हर युवा सपना देखता है. लाखों में हर साल दो तीन सौ युवाओं के सपने पूरे होते हैँ.
उत्तर प्रदेश की 2013 बैच की आईएएस अफसर दिव्या मित्तल ने रविवार को इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस से त्यागपत्र दे दिया. यह वही दिव्या मित्तल हैँ जिन्होंने IAS बनने के लिए लंदन में अपनी लाखों डॉलर के पैकेज की नौकरी ठुकरा दी थी.
दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर लंबे-चौड़े पोस्ट के जरिए अपने त्यागपत्र की जानकारी दी है. दिव्या मित्तल ने फेसबुक पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है. साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था. दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी. पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था. अपने देश में न होना खलता था. मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर. वो कर्ज़ चुकाना था. चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों. सो लौट आई, और IAS अफसर बनने का सौभाग्य मिला.’

इसके आगे उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा, “बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा. देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है. यहाँ उल्लेखनीय है कि वह “मीरजापुर में भी डीएम थीं. उन्होंने पोस्ट में लिखा ” मिर्ज़ापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है. और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है. सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था. इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला. उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है.’
‘मैं मूर्ख थी, जो सोचा था कि कुछ देने”
दिव्या मित्तल ने फेसबुक पोस्ट में जो बातें लिखी उसे लेकर अब तरह-तरह के कयास भी लग रहे हैँ. उन्होंने लिखा कि “मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूं. सच यह है कि सबसे ज़्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज़ और भी बढ़ता गया. लोग मेरी ख़ुशी में मुझसे ज़्यादा ख़ुश हुए. उन्होंने मुझे तब भी उसी विश्वास से देखा,
जब मैं खुद ही थकी या टूटी थी और इसी ने आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी. इतना प्यार, इतना सम्मान, इतना अपनापन मिला, कि मेरी झोली पूरी भर गयी और इसमें उन साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बहुत बड़ा श्रेय है जिन्होंने मेरे कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और साथ डटे रहे.”
दिव्या मित्तल एक बेहद ईमानदार अधिकारी मानी जाती थीं. उन्होंने ने लिखा कि ” आज आभार से आंखें नम हैं. बस एक दृश्य इनमें बसा है. लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध माँ, जो अपने गांव में पहली बार पानी पहुंचता देख कुछ नहीं बोली, बस कांपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई. पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा. और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया.” अब सवाल यह है कि दिव्या मित्तल ने आखिरकार IAS की नौकरी क्यों छोड़ दी. क्या उन पर कोई दबाव था. क्या वह कोरपोरेट जगत में पुनः वापसी करेंगी? बहरहाल दिव्या मित्तल का त्यागपत्र देश भर हेडलाइन है.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button