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व्यक्ति में राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण संघ करता है : दीपक विस्पूते

रायपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, रायपुर महानगर के अंतर्गत रायपुर के विमतारा हाल में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रशिक्षण प्रमुख दीपक जी विस्पुते ने प्रमुखजनों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्र के वैभव और समाज परिवर्तन के लिए व्यक्ति निर्माण सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संघ की यात्रा स्वाधीनता से पहले शुरू हुई और इसकी चार-पांच पीढ़ियों ने समाज जागरण के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया।
उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने ऐसे समय में की, जब देश का समाज चेतना शून्य हो चुका था और गुलामी की मानसिकता हावी थी। उस दौर में संघ ने शाखा के माध्यम से व्यक्ति निर्माण और समाज संगठन का कार्य प्रारंभ किया। उन्होंने बताया कि पहली पीढ़ी ने बीजारोपण किया, दूसरी पीढ़ी ने समाज में संपर्क बढ़ाकर आत्मीयता लाया, तीसरी पीढ़ी ने इसे समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाया, चौथी पीढ़ी ने समाज में सकारात्मक वातावरण निर्माण का कार्य किया और पांचवीं पीढ़ी ने विजय का दौर स्थापित किया।
श्री दीपक ने बताया कि देश की स्वाधीनता के 75 वर्ष पूरे होने पर सरकार की तरफ से अमृत महोत्सव का आयोजन किया गया था। इसमें करीब 30-35 हजार ऐसे स्वतंत्रता सेनानियों का नाम सामने आया जिन्होंने अपना काम छोड़ देश की स्वाधीनता के लिए सर्वस्व बलिदान किया। जैसे गांधी जी ने बैरिस्टरी छोड़ी, बालगंगाधर एक कुशल गणितज्ञ होते हुए अपना कैरियर छोड़ा आदि अनेक ने अपना सब सुख दाव पर लगाकर भारत को बचाया। इन लोगों ने नेशन फर्स्ट को अपना आदर्श कार्य बनाया।
उन्होंने मध्यकालीन भारत के इतिहास के उद्धरणों को प्रस्तुत करते हुए किसी व्यक्ति के दो चरित्र – व्यक्तिगत और राष्ट्रीय चरित्र के गुण – दोष बताएं। उन्होंने बताया कि कैसे उस वक्त लोगों ने अपना व्यक्तिगत चरित्र तो बचा कर रखा लेकिन राष्ट्रीय चरित्र भूल गया।
सैकड़ों वर्षों के आक्रमण के कारण एक समय ऐसा आया कि भारतीय समाज चेतना शून्य हो गया, ऐसी परिस्थिति में समाज के सामर्थ्य को जागृत करने का कार्य संघ ने किया। समाज जब अपना स्वत्व भूल जाता है तो वह अपना सामर्थ्य नहीं पहचान पाता। भारतीय समाज में भी एक समय ऐसा आया कि हिन्दू राजा नहीं बन सकता ऐसा भाव पैदा होने लगा, यहां तक की क्षत्रपति शिवाजी महाराज जी ने हिंदू पद-पादशाही की स्थापना की तो उनका भी विरोध हुआ, क्योंकि उस समय समाज अपना राष्ट्रीय चरित्र भूल गया था। पूजनीय डॉ केशव बलिराम हेडगेवार जी ने समाज को संगठित करने के लिए 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की। उन्होंने समाज में संगठन नहीं समाज के लिए संगठन के ध्येय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की।
छत्रपति शिवाजी महाराज को घात पहुंचाने के लिए औरंगजेब के पास कौन पहुंचा, उनके राज्याभिषेक का विरोध किसने किया । चन्द्रशेखर आजाद को अल्फ्रेड पार्क में पकड़वाने के लिए मुखबिरी करने वाला कौन था। यही सब देखकर संघ संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार जी ने संघ कार्य को आगे बढ़ाया कि हमारा राष्ट्रीय चरित्र मजबूत हो।
उन्होंने बताया कि संघ की यात्रा उपेक्षा, उपहास और विरोध के दौर से गुजरते हुए आगे बढ़ी, लेकिन स्वयंसेवकों के समर्पण ने इसे निरंतर मजबूत बनाया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि केरल में स्वयंसेवकों ने अपने जीवन को समाज कार्य में समर्पित कर संगठन को मजबूत किया।
उन्होंने भारतीय मजदूर संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद आदि संगठनों की स्थापना के माध्यम से राष्ट्रीय चरित्र निर्माण और भारत को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लक्ष्य को चित्रित किया।
उन्होंने कहा कि हर देश का अपना चरित्र है, परंतु भारत का चरित्र पूरे विश्व को श्रेष्ठ आचरण से श्रेष्ठ बनाना है। इसलिए अब सभी अपनी ओर आ रहे हैं। आपको देखकर समाज और राष्ट्र बदलनेवाला है।

संघ का लक्ष्य समाज को संगठित कर राष्ट्र को श्रेष्ठ बनाना है। इसके लिए शताब्दी वर्ष में पंच परिवर्तन पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिसमें कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य और स्वदेशी भाव को मजबूत करना शामिल है।
उन्होंने कहा कि “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना के साथ भारत पूरी दुनिया को श्रेष्ठ बनाने की क्षमता रखता है और इसके लिए समाज के हर व्यक्ति को राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ कार्य करना होगा।
श्री दीपक विस्पूते ने कहा, आज दुनिया भोगवाद और विस्तारवाद के जिस मार्ग पर आगे बढ़ रही है, ऐसे समय में पूरा विश्व भारत की ओर आशा की दृष्टि से देख रहा है। हमें एक विकसित और सामर्थ्यवान भारत के लिए संकल्प लेना होगा, इसमें सज्जन शक्ति की अग्रणी भूमिका है। यह कार्य परिवार में नैतिक मूल्यों और संस्कार से शुरू होगा। हम यदि स्व का भाव विकसित कर लें तो पर्यावरण अनुकूल एवं सामाजिक समरसता युक्त समाज की स्थापना में सफल होंगे। प्रमुख जन गोष्ठी में
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माननीय प्रांत संघचालक डॉ टोपलाल वर्मा सहित शिक्षा, उद्योग, चिकित्सा समेत अलग-अलग क्षेत्रों के गणमान्य जन उपस्थित रहे।

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