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पत्रकार तरुण चतुर्वेदी ने साय सरकार के बजट को बताया बस्तर के विकास का रोडमैप, जानिए क्या कहा…

लेखक तरूण चतुर्वेदी पिछले एक दशक से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं, जी न्यूज और एनडीटीवी जैसे बड़े संस्थानों से जुड़े रहे हैं। यह आर्टिकल उनके सोशल मीडिया हैंडल से साभार लिया गया है.

24 फरवरी की तारीख छत्तीसगढ़ के विकास इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन गई है। राज्य के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1,72,000 करोड़ रुपये का अनुमानित बजट पेश किया। नई विधानसभा में प्रस्तुत यह पहला बजट न केवल प्रतीकात्मक रूप से विशेष है, बल्कि अपनी थीम और दूरदर्शी दृष्टि के कारण भी यादगार बन गया है। पिछले दो बजट ‘ज्ञान’ और ‘गति’ पर केंद्रित थे, जबकि इस बार का बजट ‘संकल्प शक्ति’ को आधार बनाकर तैयार किया गया है। यह संकल्प समावेशी विकास, अधोसंरचना विस्तार, निवेश प्रोत्साहन, कुशल मानव संसाधन, अंत्योदय और आजीविका सृजन के माध्यम से नीति से परिणाम तक ठोस परिवर्तन लाने की दिशा में एक व्यापक प्रयास है।

बस्तर और सरगुजा पर विशेष फोकस
इस बजट की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है बस्तर और सरगुजा जैसे लंबे समय से विकास से वंचित अंचलों पर विशेष ध्यान दिया गया है। नक्सलवाद की छाया में वर्षों तक पिछड़े रहे इन क्षेत्रों को मुख्यधारा में लाने का स्पष्ट संकल्प इस बजट में दिखाई देता है। विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार ने जनकेंद्रित दृष्टिकोण के साथ बस्तर में सुरक्षा, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में व्यापक निवेश का खाका प्रस्तुत किया है। खास बात यह है कि कृषि पंपों के उर्जीकरण के लिए 5500 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इससे प्रदेश के साथ बस्तर के किसानों को भी रहात मिलेगी।  भूमिहीन कृषि परिवारों के लिए 600 करोड़ व कृषक उन्नति योजना के लिए 10 हजार करोड़ का प्रावधान बजट में किया गया है। ताकि विकास से पिछड़ रहे भूमिहीन किसान आगे बढ़ सकें। 

सुरक्षा और अधोसंरचना
बस्तर में सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए 1,500 ‘बस्तर फाइटर्स’ पदों के सृजन का प्रावधान किया गया है। यह कदम नक्सल प्रभाव को निर्णायक रूप से समाप्त कर स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही, बस्तर और सरगुजा क्षेत्र को प्रदेश व देश के अन्य हिस्सों से बेहतर संपर्क प्रदान करने के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह राशि सड़क और संपर्क सुविधाओं को सशक्त बनाने में सहायक होगी।

रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था
स्थानीय आजीविका को बढ़ावा देने के लिए कृषि एवं एग्रो-फॉरेस्ट प्रोसेसिंग, राइस मिल, पोल्ट्री फार्म जैसे रोजगारोन्मुख उद्योगों हेतु 100 करोड़ रुपये के निवेश का प्रावधान किया गया है। इससे ग्रामीण और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। प्रदेश में 23 नए औद्योगिक पार्क स्थापित किए जाएंगे। इससे बेरोजगारों के लिए नए अवसर सृजित होंगे। बस्तर क्षेत्र के लिए औद्योगिक पार्क अर्थिक बदलाव की दिशा में कारगर कदम साबित होंगे।

शिक्षा और स्वास्थ्य में बड़ा निवेश
कुनकुरी, दंतेवाड़ा और मनेंद्रगढ़ में मेडिकल कॉलेजों के संचालन के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे चिकित्सा शिक्षा का विस्तार होगा और स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। विशेष रूप से अबूझमाड़ को ‘एजुकेशन सिटी’ के रूप में विकसित करने के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। जो क्षेत्र कभी नक्सल गतिविधियों के लिए कुख्यात था, वहीं अब शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित होने जा रहा है यह बदलाव अपने आप में ऐतिहासिक है।

पर्यटन: संभावनाओं का नया द्वार
पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए होम-स्टे योजना हेतु 10 करोड़ रुपये तथा मैनपाट के विकास के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता घने जंगल, पर्वत श्रृंखलाएं, नदियां और झरने देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने की अपार क्षमता रखते हैं। पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों स्तरों पर मजबूती मिलेगी।

संकल्प से सशक्त प्रदेश की ओर
‘ज्ञान’ से जागरूकता, ‘गति’ से विकास और अब ‘संकल्प’ से स्थायी परिवर्तन छत्तीसगढ़ का यह तीसरा बजट इसी क्रम का विस्तार है। यह मात्र एक वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि विशेषकर बस्तर के लिए जमीन से आसमान तक उड़ान भरने का रोडमैप है। सरकार का यह बजट संदेश देता है कि विकास अब बस्तर और सरगुजा की चौखट पर दस्तक दे चुका है। यदि योजनाएं प्रभावी क्रियान्वयन तक पहुंचती हैं, तो यह बजट सचमुच ‘नए बस्तर’ और सशक्त छत्तीसगढ़ की आधारशिला साबित हो सकता है।

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