नई दिल्ली। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूं ही नहीं देशवासियों के दिल में राज करते हैं। वह बिना लाग लपेट के जो बात उन्हें सच लगती है उसे बोलने से संकोच नहीं करते हैं, हां उससे किसी को खुशी मिले या गम। ऐसा ही उन्होंने दो दिन पहले एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि बच्चों से स्कूल में यदि छोटे-मोटे काम करवा लिया जाए उनसे श्रमदान करवाकर यदि उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाने का प्रयास हो तो मीडिया वाले ऐसे खबर चलाते हैं मानो क्या ही कहा जाए। उन्होंने कहा ऐसे शिक्षकों को जो बच्चों को संस्कारित और उन्हें अच्छा नागरिक बनाने का प्रयास करते हैं उन्हें निलंबित करने के बजाय सम्मानित किया जाना चाहिए।
दरअसल पिछले कुछ सालों से बच्चों को जिस तरह छूईमुई की तरह ट्रीट किया जाता है उसे लेकर आए दिन समाचार आते हैं। एक समय था जब स्कूलों में बच्चों को टीचर डांट भी दिया करते थे। जरा कड़ाई भी करते थे, लेकिन आज यदि किसी बच्चे को टीचर थोड़ा भी डांट दें तो उनके अभिभावक पहाड़ सिर में उठा लेंगे। वहीं मीडिया वाले जो कि पहले ही खबरों के अकाल से जूझ रहे होते हैं उन्हें तो मानो भारत-पाकिस्तान के बीच कोई सीमा विवाद का मामला मिल गया हो , वह जब तक उस टीचर को निलंबित नहीं करा देते धरती आसमान एक कर देंगे। ऐसे लोगों को यकीनन योगी आदित्यनाथ की अपील से कुछ सबक लेना चाहिए। खास बात यह है कि योगी जी का यह बयान सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रहा है। लोग उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं।
ख़ासकर बाल अधिकारों के संरक्षण में लगी संस्थाओं को भी बाल अधिकार और बच्चों को संस्कारित करने के लिए किए जाने वाले प्रयासों में अंतर करना होगा।

