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राम मंदिर के दान में ऐसे करते थे कांड, क्या दान चोरों पर होंगी कार्रवाई?

PM at Shri Ram Janmbhoomi Mandir Dhwajarohan Utsav, in Ayodhya, Uttar Pradesh on November 25, 2025.

नई दिल्ली : (Ram Mandir Donation issue)

राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे में चोरी मामले में गठित एसआईटी जल्द ही अपनी शुरुआती जाँच रिपोर्ट सीएम योगी आदित्यनाथ को सौंप देगी. सूत्रों के मुताबिक सीएम योगी इस मामले में दोषियों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी में हैँ. वहीं इस मामले में लगातार नए खुलासे हो रहे हैँ. अयोध्या के राम मंदिर में दान और चढ़ावे के हिसाब में गड़बड़ियां थीं, गड़बड़ियों की शिकायतें भी की जाती थीं, इसे ठीक करने का सुझाव दिया जाता था और ये बात लगभग सबको पता थी. लेकिन गड़बड़ियों, शिकायतों और सुझावों के बीच इन जानकारियों की अनदेखी की गई. जिम्मेदार लोगों को जब कुछ बताया जाता तो जवाब आता कि ‘जाने दो, राम जी सब देख रहे हैं’. इसी भगवान भरोसे वाले रवैये की वजह से शुरू में जो छोटी गड़बड़ियां थीं, वो धीरे-धीरे बढ़ती चली गईं और आज परिणाम ये है कि पूरा ट्रस्ट शक के घेरे में है. लोगों की आस्था से इतना बड़ा खिलवाड़ शायद ही इतिहास में कभी हुआ हो.

कच्ची रसीद के नाम पर होता था खेल

दरअसल, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने अपने गठन के प्रारंभ में ऑडिट से जुड़े कुछ भरोसेमंद लोगों से हर दिन का लेखा-जोखा देखने और सुझाव देने को कहा था. इन ऑडिटर्स ने बताया कि जो दान के पैसे आ रहे हैं, उसमें कुछ अनियमितता हो रही हैं. बताया गया कि बिना रसीद के चंदा लिया जा रहा है, कुछ लोग कच्ची रसीद के नाम पर पैसे लेकर इधर-उधर कर रहे हैं.

स्थिति यहाँ तक थी कि आभूषणों का भी कोई हिसाब नहीं, शिकायत के बाद भी
आरोप ये भी लगा कि आभूषणों का कोई हिसाब ठीक से नहीं हो रहा है. इन सुझावों के बाद भी ट्रस्ट नींद में ही सोया रहा. उसने कोई ठोस कदम नहीं उठाया. सूत्र बता रहे हैं कि जब किसी की शिकायत आती तो उसे बुलाकर “झिड़की” दे दी जाती लेकिन उन पर ना कार्रवाई होती और ना ही व्यवस्था के कोई बड़ा बदलाव करने की कार्रवाई ही दिखाई दी.

समय बीतता गया और मंदिर बन कर तैयार हो गया. पहले मंदिर निर्माण के लिए चंदा आता था लेकिन प्राण प्रतिष्ठा के बाद भगवान के चरणों में चढ़ावा आने लगा. चंदा चढ़ावे में बदल गया लेकिन राम मंदिर ट्रस्ट ने सिस्टम में कोई प्रोफ़ेशनल बदलाव नहीं किए.

बदनामी का डर और भगवान के न्याय के भरोसे छोड़ दी गई गड़बड़ी
सवाल है कि क्या ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने व्यवस्था में लगे लोगों का कारसेवकपुरम से जुड़ाव देखकर ये मान लिया था कि “थोड़ा-बहुत” तो ये लोग करेंगे ही लेकिन धीरे-धीरे गड़बड़ी थोड़ा से बहुत में बदल गई. क्या कभी ये सोचा गया कि बात बाहर जाएगी यो बदनामी होगी. क्या कभी यह नहीं सोचा कि भगवान गड़बड़ी करने वालों को देख ही रहे हैं.

अर्थात बदनामी और भगवान के न्याय के नाम पर गड़बड़ी होने दी गई लेकिन गड़बड़ लोगों पर कोई एक्शन नहीं हुआ. नतीजा ये रहा कि कार्रवाई ना होने से मन बढ़ता गया और उसका नतीजा आज सबके सामने है.

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