नई दिल्ली : देश की अर्थव्यवस्था में प्राइवेट सेक्टर की अहम भूमिका है लेकिन कई बार निजी क्षेत्र के उपक्रमों में भी जो वित्तीय अनुशासन और कारपोरेट दक्षता की दरकार होती है उसकी अनदेखी कर दी जाती है. ऐसे में जाहिर है जहां गवर्नेंस तथा अनुशासन की कमी होगी वहां प्रबंधन कमजोर पड़ेगा और इसका असर संस्थान के उद्देश्य पर पड़ेगा. ऐसी ही कुछ चुनौतियों से एचडीएफसी बैंक को भी पिछले कुछ साल से जूझना पड़ा. जब पानी सिर से ऊपर बहने लगा तो समाधान की याद आई . जैसा कि होता आया है देश में जब भी किसी बड़ी चुनौती का समाधान करना होता है तो भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और उनके अनुभव काम आते हैं. भले ही वह सेवानिवृत्त क्यों न हो गए हों. ऐसा ही एक सफल नेतृत्व एचडीएफसी बैंक को राजीव कुमार पूर्व वित्त सचिव एवं पूर्व चुनाव आयुक्त के रूप में मिलने जा रहा है. बैंक ने उन्हें अपना अंशकालीन चेयरमैन नियुक्त किया है.
इस साल मार्च महीने में बैंक के पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने अचानक इस्तीफा दे दिया. उन्होंने इसके पीछे मूल्य और नैतिकता का हवाला दिया. अपने इस्तीफा पत्र में उन्होंने लिखा कि बैंक में कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं या कामकाज के कुछ ऐसे तरीके हैं, जो उनके नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों के अनुरुप नहीं है. उनके इस्तीफे के बाद बैंक में नेतृत्व (लीडरशिप) को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी, लेकिन अब राजीव कुमार की नियुक्ति के साथ बैंक में कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर चिंताएं दूर होने की उम्मीद जगी है.
उपलब्धियों भरा रहा भारतीय प्रशासनिक सेवा का कार्यकाल
राजीव कुमार देश के एक सफल प्रशासनिक अधिकारी रहे हैं. 2017 से 2020 के बीच वित्त सचिव रहते हुए महंगाई पर नियंत्रण के साथ ही सामान्य जन को आयुष्मान भारत जैसी योजना प्रदान करने का श्रेय राजीव कुमार के नेतृत्व को जाता है. 2018-19 में वित्त सचिव के रूप में उनके कार्यकाल में ही रेलवे के लिए ₹1.48 लाख करोड़ का पूंजीगत व्यय आवंटित किया गया था. यहां उल्लेखनीय है कि देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डालर के स्तर पर ले जाने का लक्ष्य उनके कार्यकाल में ही 2019-20 के बजट में रखा गया था. वह रिजर्व बैंक आफ इंडिया और सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक एसबीआई के बोर्ड में सदस्य भी रह चुके हैं.
25वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में उन्होंने 2024 का लोकसभा चुनाव बड़े ही शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया. 1984 बैच के आईएएस अधिकारी राजीव कुमार ने 1 सितंबर, 2020 को चुनाव आयुक्त के रूप में चुनाव आयोग में कार्यभार संभाला और 15 मई, 2022 को भारत के 25वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार ग्रहण किया. आयोग में उनका साढ़े चार साल का कार्यकाल संरचनात्मक, तकनीकी, क्षमता विकास, संचार, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और प्रशासन सहित विभिन्न क्षेत्रों में मौन लेकिन गहन सुधारों से चिह्नित रहा.

