रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 21 जून को श्री सुदर्शन स्मृति राष्ट्रीय व्याख्यान का आयोजन किया गया. व्यखायान का विषय राष्ट्रीय कर्तव्य : स्वार्थ ही देशद्रोह था. यह आयोजन श्री सुदर्शन प्रेरणा मंच द्वारा किया गया. जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक एवं शिक्षाविद मुकुल कानिटकर ने राष्ट्रीय कर्तव्य पर बहुत ही ओजस्वी एवं प्रेरक उद्बोधन दिया. उन्होंने कहा, संघ एक विचार प्रवाह है. यह कुल और कुटुंब की तरह कार्य करता है. यह राष्ट्र सेवा का भावनात्मक सांस्कृतिक प्रयास है, संघ समाज में कोई संगठन नहीं समाज का संगठन करने वाला अभियान है. उन्होंने कहा,
संघ की कोई अचल सम्पत्ति नहीं है. संघ समाज का है उसके साथ एक रस होकर चलता है. संघ की प्रेरणा से जो संगठन चलते हैँ उनके पंजीयन हैँ उनका ऑडिट होता है. वहाँ पारदर्शिता के सर्वोत्तम मानक अपनाए जाते हैँ. हाँ, संघ को नहीं जानने वाले अनर्गल प्रलाप करते हैँ. उन्होंने कहा, संघ शताब्दी वर्ष का आयोजन नहीं कर रहा और न ही यह उत्सव है क्योंकि यह कोई संस्था नहीं. संघ शताब्दी वर्ष एक अवसर है अपने कार्य को और गुणवत्ता देने के लिए. अपने संबोधन में मुकुल कानिटकर ने कहा, एक प्रश्न प्राय: किया जाता है कि स्वतंत्रता आंदोलन में संघ की क्या भूमिका थी. डॉक्टर साहब स्वयं क्रन्तिकारियों की अनुशीलन समिति के सदस्य थे. तत्कालीन कांग्रेस द्वारा संचालित स्वतंत्रता आंदोलन अभियान में सक्रिय भागीदारी करते थे. उन्हें जेल भी जाना पड़ा. डॉक्टर साहब ने समाज को संगठित करने के लिए राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण पर जोर दिया क्योंकि सिर्फ व्यक्तिगत चरित्र का अच्छा होना पर्याप्त नहीं. उन्होंने कहा, हिंदुत्व एक उपासना पद्धति नहीं जीवन पद्धति है. एक ईश्वर, एक पंथ, एक मजहब एक रिलीजन ही श्रेष्ठ हमारे यहाँ ऐसा भाव नहीं है. हमारे यहाँ नास्तिक भी पूज्य है. सनातन एवं भारतीय संस्कृति समन्वयवादी दृष्टिकोण पर आधारित हैँ. हमारे यहाँ सर्वें भवन्तु: सुखिनः कहा जाता है. हिन्दू भवन्तु सुखिन: नहीं कहा जाता है. भारत का समाज करार सोशल कॉन्ट्रैक्ट से नहीं बना है. हिंदुत्व मैं से हम की यात्रा है. स्व का बोध ही हिंदुत्व है. आज अपनी भाषा के प्रति सम्मान नहीं है. स्व का बोध पहली सीढ़ी है, दूसरी सीढ़ी कुटुंब है. स्व का आधार है सुरक्षा. यह आर्थिक एवं मानसिक दोनों ही औपनिवेश बनने से सुरक्षा देता है. मल्टी नेशनल कम्पनियों की बैलेंस सीट देखें तो पता चलेगा दान का किसे किया जाता है. भारत विरोधी ताकतों को दान किया जाता है. मुकुल कानिटकर ने कहा,
पूज्य सुदर्शन जी दुरदृष्टा थे. जनसांख्यकी, पर्यावरण समेत अनेक चुनौतियों पर उन्होंने कई दशक पहले विचार भी और समाधान भी प्रस्तुत किया. उन्होंने कहा,
कुटुंब प्रबोधन के लिए एक दूसरे को सुनना होगा. सामाजिक समरसता एक महत्वपूर्ण विषय है जिसका आधार ही सम्मान है. हम विचार करें कि हमारे सम्मान का आधार वर्ग या वंश है या हमारी आत्मीयता है.
आज पूरा विश्व जलवायु संकट से जूझ रहा है. दोहा में अर्थ समिट के लिए बोध वाक्य लिखा जाना था तो दुनिया के पर्यावरण प्रेमी व वैज्ञानिक एकत्र हुए उन्होंने अर्थ इज मदर कहा. इस विचार का मूल ऋग्वेद से ही तो आया है. आखिरकार दुनिया को जलवायु संकट के समाधान के लिए हिंदुत्व व भारत की ओर लौटना पड़ा. पर्यावरण की चेतना धरती के प्रति वेदना से जागृत होता है.
अंतिम विषय नागरिक कर्तव्य का आता है.
जिस राष्ट्र की पूरी संस्कृति कर्तव्यबोध पर आधारित है वहाँ कर्तव्य पालन को संविधान में अधिकार से पीछे रखा गया है. यह विरोधाभासी है. आज पश्चिम की नकल की प्रवृत्ति बढ़ी है. विकास के मानक शहरीकरण से तय हो रहे हैँ.
ग्रामीण सम्मान की दृष्टि से देखे जाएं तो तीर्थ बनेंगे. हमारे यहाँ नागरिक शब्द पाश्चात्य की देन है. नागरिक सिटीजन से आया है. अमेरिका में रहना गर्व का विषय है. मेरा बच्चा शहर में रहता है गांव के लिए ऐसा भाव नहीं आता क्योंकि दृष्टि शहर आधारित है. मुकुल कानिकटकर ने कहा अब तो भ्रष्टाचार को सामाजिक प्रतिष्ठा का विषय बनाया जाने लगा है जब तक यह सामाजिक बहिष्कार का विषय नहीं बनेगा इससे मुक्ति नहीं मिलेगी. उन्होंने कहा देश के 160 करोड़ लोग कोशिका की तरह हैँ, एक भी कोशिका यदि अपना कार्य नहीं करेगी, अपना दायित्व नहीं निभाएगी तो पूरे शरीर को बीमारी और नुकसान होगा. उन्होंने कहा, श्रीराम मंदिर रामलला के चढ़ावे और दान में चोरी करने वाले हों या किसी तरह का भ्रष्टाचार करने वाले सबको इसी जन्म में हिसाब देना होगा. ऐसे लोगों को कीड़े पड़ेंगे. कार्यक्रम में मुख्यअतिथि के रूप में भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी अनुराग पांडे ने श्री सुदर्शन जी से जुड़े संस्मरण साझा करते हुए बताया कि हम बचपन में पूज्य सुदर्शन जी के बॉद्धिक की कैसेट तैयार करते थे, जिसे प्राय: सुनते थे. उस समय सोशल मीडिया का दौर नहीं था. कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रान्त संघचालक टोपलाल ने कहा सुदर्शन जी जीवन के अंतिम क्षण तक समाज कार्य में सक्रिय रहे. मैं उनके देहावसान से एक दिन पूर्व उनसे मिलने गया, जहाँ एक पुस्तक में उनका हस्ताक्षर प्राप्त किया. कार्यक्रम का सफल संचालन शशांक शर्मा ने किया.
इस आयोजन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्य क्षेत्र बौद्धिक प्रमुख नागेंद्र, प्रान्त प्रचारक अभय राम, प्रान्त प्रचार प्रमुख संजय तिवारी, इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय क़ृषि विश्वविद्यालय के कुलपति गिरीश चंदेल, प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी समेत बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी उपस्थित रहे.

