नई दिल्ली : आखिरकार वही हुआ जिसकी आशंका जाहिर की जा रही थी। नीट पेपर लीक के बहाने छात्रों के हितों की आड़ में शुरू हुआ आंदोलन कैसे भारत विरोध का अड्डा बनता जा रहा है, इसका जीता जागता उदाहरण है जंतर मंतर में चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन बन गया है. सवाल है कि छात्रों के नाम पर एक जाति विशेष को गाली देने से लेकर अश्लील गाली और पोस्टर क्या एक अच्छे समाज में स्वीकार्य हैं…
ब्राह्मणों को दी जा रही गालियां
यहां जातिवाद का जैसा रंग देखने को मिल रहा है वह निश्चित ही चिंताजनक है। कहने को जेन-जी को प्रगतिशील माना जाता है लेकिन आंदोलन में पहुंचे अराजक युवा सिर्फ ब्राह्मणों को गाली दे रहे हैं.
महिलाओं को गाली
इटली की पीएम मैलोनी को लेकर जिस तरह मीम बनाए जा रहे हैं, उनके लिए अपशब्द का प्रयोग किया जा रहा है वह सभ्य समाज में कतई बर्दाश्त नहीं है।
अश्लील नारे लगाए जा रहे हैं
यहां पहुंच रहे अराजक युवाओं में एक बड़ा तबका अश्लील नारे लगा रहा है, पोस्टर बैनर में ऐसे शब्द लिखे जाते हैं जिसे सार्वजनिक रूप से पढ़ना भी उचित नहीं है.
हिन्दूओं की आस्था को अपपानित किया जा रहा
यहां मंच से भगवान राम और सीता को लेकर एक कॉमेडियन ने जिस तरह आपत्तिजनक बातें कहीं उससे इस आंदोलन के भविष्य का आकलन किया जा सकता है.
अल्पसंख्यकों की बड़ी संख्या
आंदोलन में 70-80 प्रतिशत संख्या एक समुदाय विशेष की है. वह मोदी विरोधी नारे लगाते हैं. बीच-बीच में मजहबी नारे लगाते हैं.
ऐसे में जंतर-मंतर में चल रहे आंदोलन को अराजक न कहा जाए तो क्या कहें।

