भोपाल : कुछ महीने पहले कहां राज्यसभा जाने की तैयारी थी वहीं अब सीधे राजनीति से सन्यास. हर बार की तरह एक बार फिर कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने लोगों को चौका दिया है. उन्होंने राजनीति से सन्यास ले लिया है. उनका कहना है अब वह सिर्फ धर्म की रक्षा के कार्य में जुटेंगे. अभी कुछ दिन पहले ही उन्होंने कहा था कि वह उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा निकालेंगे, जो पूरी तरह से गैर राजनीतिक होगी. सवाल यह है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि पार्टी में नजरअंदाज किए जाने से उन्होंने यह निर्णय लिया हो.
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री का कहना है “सनातन धर्म को समझता हूं.” इसके अलावा में बीजेपी, विश्व हिंदू परिषद, RSS को भी समझता हूं. मैं 80 साल का हो गया है. मेरी पार्टी ने पांच बार विधायक बनाया है. दो बार लोकसभा में भेजा और दो बार राज्यसभा में भेजा. इस बार मैंने कहा कि साहब किसी और को लाइए. मेरा काम अब धर्म रक्षा है. अब राजनीति नहीं करूंगा, भाषण दूंगा न पोस्ट करूंगा, सिर्फ धर्म की लड़ाई लडूंगा. अंतिम सांस तक अब धर्म की लड़ाई लडूंगा. दशहरे के दिन अयोध्या की यात्रा पर निकलेंगे.”
दिग्गी राजा ने कहा “राम मंदिर आंदोलन में गोलियां खाने वाले को यात्रा में बुलाएंगे. इसी वजह से कारसेवक संतोष दुबे यात्रा के चीफ गेस्ट होंगे. उनके शरीर में चार गोलियां लगी थीं. आज उनके बयान पढ़ लीजिए.” यहां उल्लेखनीय है कि 2003 में मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की करारी हार के बाद दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश की राजनीति से खुद को दस साल के लिए अलग कर लिया था. पार्टी ने उस समय उन्हें महासचिव बनाया था. उस दौर में उन्हें राहुल गांधी का राजनीतिक गुरू भी कहा जाता था. हालांकि बाद के सालों में वह पार्टी में भी अलग-थलग पड़ते नजर आए. राजनीतिक हलकों में इस बात के भी कयास लगाए जा रहे हैं कि दिग्गी राजा ने कहीं लगातार हो रही अपनी उपेक्षा के बाद तो नहीं यह कदम उठाया…

