रायपुर : ओडिसा में एक ऐसा मंदिर है जहां दर्शन मात्र से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है, बशर्ते भक्त सात्विक एवं भगवान के प्रिय भक्त हों. लिंगराज मंदिर (Lingaraja Temple in Hindi) भारत के सबसे महत्वपूर्ण और पूजनीय मंदिरों में से एक है, जो भारतीय राज्य ओडिशा के भुवनेश्वर शहर में स्थित है. यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और कलिंग वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है. मंदिर परिसर में कई संरचनाएँ शामिल हैं, जैसे कि विमान, जगमोहन, नटमंदिर और भोग-मंडप, जिनमें से प्रत्येक अपनी जटिल नक्काशी और डिज़ाइन के लिए जाना जाता है.
मंदिर का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व बहुत अधिक है और यह भगवान शिव के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है.
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 20 सितंबर को भुवनेश्वर प्रवास के दौरान प्रसिद्ध भगवान लिंगराज मंदिर पहुंचकर सपत्नीक दर्शन-पूजन किया. मुख्यमंत्री ने विधि-विधान से भगवान लिंगराज की पूजा-अर्चना कर छत्तीसगढ़ के सभी नागरिकों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की.
इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भगवान लिंगराज के दर्शन और उनकी पावन भूमि पर आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मंदिर परिसर की दिव्यता और आध्यात्मिक वातावरण मन को असीम शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है. उन्होंने भगवान लिंगराज से छत्तीसगढ़ की निरंतर प्रगति तथा प्रत्येक परिवार के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की.
मुख्यमंत्री साय ने लिंगराज मंदिर की भव्य स्थापत्य कला का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे प्राचीन मंदिर केवल आस्था के केंद्र ही नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता, संस्कृति और अद्भुत शिल्प परंपरा के जीवंत प्रतीक भी हैं. लिंगराज मंदिर की भव्यता और उत्कृष्ट वास्तुकला हमारी सनातन संस्कृति की समृद्ध विरासत का सुंदर दर्शन कराती है.
उन्होंने कहा कि ओडिशा और छत्तीसगढ़ भौगोलिक रूप से पड़ोसी होने के साथ-साथ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. दोनों राज्यों की लोक परंपराओं, आस्था और सांस्कृतिक विरासत में अनेक समानताएं देखने को मिलती हैं। ऐसी यात्राएं हमारी साझा सांस्कृतिक चेतना और आत्मीय संबंधों को और प्रगाढ़ करती हैं.

