क्या Gen-Z को टेंशन दे रहे हैं मिलेनियल्स?

Gen-Z के लिए क्लेश नहीं फ्रेंड बनिए

सुबह-दोपहर और शाम पल-पल सोशल मीडिया पर स्टेटस अपडेट और स्नैपचैट। भाई को ब्रो, सिस्टर को सिस और टॉक्सिक वर्जन गालियों के साथ चिल करो का तकिया कलाम। फीलिंग्स जताने के लिए शब्दों की जगह इमोजी बेस्ड एक्सप्रेशन। फ्रेंड्स के साथ क्लबिंग, हुक्का और सुट्टा बार जाने को लेकर घर पर क्लेश। रिलेशनशिप की जगह सिचुएशनशिप पर यकीन रखने वाले Gen-Z (Generation-Z) की महज क्या इतनी पहचान है। यह वह जेनरेशन है जो 1996 से 2012 के बीच इस दुनिया में आई है। इनके पीछे मिलेनियल्स (1980-1996) और आगे अल्फा (2012-2025) हैं। वैसे तो हर जेनरेशन को उसकी पिछली पीढ़ी के लोग किसी न किसी बात पर कोसते हैं, लेकिन Gen-Z का मिलेनियल्स के साथ कुछ ज्यादा ही टकराव है। ये जेनरेशन मिलेनियल्स,एक्स, बेबी बूमर्स के मुकाबले टेक्नोलॉजी और कल्चर की सरहदों को फांदने में काफी आगे है। मिलेनियल्स और एक्स मां-बाप को भी लगता है आखिर वह भी तो ग्लोबल विलेज में पैदा हुए हैं। ऐसे में लाइफस्टाइल से लेकर मोरल वैल्यूज पर ज्ञान देने का कुछ हक तो बनात ही है।

जेन-जी की ताकत को पहचानें

कैसे कम होगा जेनरेशन गैप

Gen-Z को ज्ञान देते समय मिलेनियल्स और एक्स जेनरेशन मां-बाप वही गलती करते हैं जिसके लिए वह बेबी बूमर्स से झगड़ते थे। उन्हें लंबा चौड़ा ज्ञान देने के बजाय एग्जांपल सेट करना बेहतर होगा। नौकरीपेशा मां-बाप खुद फास्ट फूड और जंक फूड पर जरुरत से ज्यादा डिपेंड होंगे तो Gen-Zसे बेहतर खानपान की उम्मीद बेईमानी है। न्यूक्लियर फैमिली को सबसे अधिक अपनाने वाले मिलेनियल्स को पहले खुद भी सोशल होना पड़ेगा। Gen-Z भारत जैसे उभरते हुए देश के वर्कफोर्स का अहम हिस्सा हैं। क्या हम इस जेनरेशनर को एक बेहतर वर्ककल्चर दे पा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक 33 परसेंट Gen-Z अपनी नौकरियों से खुश नहीं हैं। ऐसे में जॉबप्लेस को एक्साइटमेंट के उपाय करने होंगे। उन्हें घर से लेकर वर्कप्लेस पर ऐसी मेंटरिंग की जरुरत है जो उनकी उम्मीदों और सोच को पंख लगाने वाला हो।

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